जय जवान जय किसान का नारा कब और किसने दिया

हेलो दोस्तों आज की जानकारी में हम बात करने वाले हैं जय जवान जय किसान के बारे में एक नारा कब और किसने दिया आज हम संक्षिप्त में इस के विषय में बात करेंगे।

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जय जवान जय किसान का नारा कब और किसने लगाया

लाल बहादुर शास्त्री कौन थे

जय जवान जय किसान का नारा किसने दिया। स्वतंत्रता भारत के दूसरे प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री ने पहले प्रधानमंत्री कौन थे। लाल बहादुर शास्त्री जी का 2 अक्टूबर 1995 मुगलसराय में एक साधारण परिवार में हुआ था विद्यार्थी जीवन में वह के शहर में पढ़ने जाया करते थे।

बीच में गंगा नदी पड़ती थी शास्त्री जी की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण कभी-कभी नाव की उतराई देने के लिए उनके पास पैसा नहीं रहता था। तब वह तैरकर गंगा नदी पार करते थे मल्लाह बिना पैसा लिए पार उतार देने के लिए कहता किंतु वे किसी का एहसान लेना पसंद नहीं करते थे नदी में तैरने को वह एक बयान भी समझते थे।

कितने उच्च विचार थे शास्त्री जी के कितने साहसी और निर्भीक थे वह ऐसे ही विद्यार्थी तो लघु से महान बनते हैं जो सद्गुणों से धनी होते हैं।

छोटा कद आवाज तो छूटने जैसी सादा रहन-सहन साधारण भोजन किंतु आदर्श जीवन सत्य का बल सदाचार की स्थिति हिमालय की दृढ़ता फल से लदे वृक्ष की शाखा जैसी विनम्रता उनमें कूट-कूट कर भरी थी एक गुड मानव को कहां से कहां तक उठा सकते हैं कहा नहीं जा सकता कौन जानता था कि कांग्रेसका यह साधारण कार्यकर्ता एक दिन स्वतंत्र भारत का प्रधानमंत्री बनेगा।

शास्त्री जी से सब लोग खुश रहते थे वह एक बार जो निश्चय कर लेते थे उससे उन्हें उन्हें डेगाना सरल नाथा शास्त्री जी के जीवन में एक नहीं अनेक बार ऐसे प्रसंग आए जब उनका यही विशिष्ट गुण प्रेरणा का स्रोत बन गया ऐसे प्रसंग आज ही प्रेरक हैं।

लाल बहादुर शास्त्री ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा कब और क्यों दिया।

वह एक बार रेल मंत्री थे एक भीषण रेल दुर्घटना हो गई उन्होंने त्यागपत्र दे दिया क्योंकि वह उत्तरदायित्व के प्रति पूर्ण सजाए थे त्यागपत्र देकर वह कार्यालय से बाहर निकले तब ड्राइवर उन्हें देखते ही कार्य का फाटक खोलने हेतु आगे बढ़ा उन्होंने ड्राइवर से कहा अभी अभी मैंने त्याग पत्र दे दिया है इसलिए मैं सरकारी कार से घर नहीं जाऊंगा मैं पैदल ही चल रही है वह बहुत कहने पर भी गाड़ी में नहीं बैठे अपने निश्चय पर दे रहे।

उन्होंने तुरंत सरकारी बंगला भी छोड़ देने का निश्चय किया किसी ने पूछा आप इतने बड़े बंगले को छोड़कर एक छोटे मकान में जा रहे हैं उसमें आपका सामान कैसे आएगा उन्होंने कहा मेरे पास क्या है या देखो एक संदूक और एक बिस्तर बिस्तर बगल में दबाकर और संदूक हाथ में लेकर कहीं भी जा सकता हूं ऐसे थे श्री लाल बहादुर शास्त्री।

अपने पुत्र के विवाह उत्सव में शास्त्री जी ने केवल ₹5 तक का उपहार स्वीकार किया उससे कीमती सामान को वापस करा दिया उन्होंने कहा कि मैं मंत्री अवश्य हूं परंतु मैं हूं तो एक गरीब आदमी ही मैंने इतने मूल्य का उपवास स्वीकार कर सकता हूं जितने मूल्य का मैं दे सकता हूं धन्य है उनके विचार आदर्श का उच्चतम शिखर।

जब उत्तर प्रदेश के गृहमंत्री थे उनके एक परिचित ने उनसे अपने लड़के को दरोगा बना देने के लिए आग्रह किया उसने बताया कि कद में केवल आधा इन छोटा होने के कारण उसे दरोगा नहीं बनाया जा रहा है शास्त्री जी गंभीर हो गए वह उस व्यक्ति से बोल यदि आपका पुत्र कद में छोटा है तो वह दरो कैसे बन सकता है।

उस व्यक्ति ने इस पर कुछ नाराज होकर कहा आपका कद तो मेरे वजह से भी छोटा है आप फिर भी गृह मंत्री बन गए तब दरोगा क्यों नहीं बन सकता शास्त्री जी थोड़ा मुस्कुरा कर बोले आपका कहना ठीक है मैं अकेला हूं गिरी मंत्री बन सकता हूं दरोगा तो नहीं बन सकता आपका लड़का गृह मंत्री बनना चाहे तो प्रयास करें मेरी हार्दिक शुभकामनाएं उसके साथ हैं। वह आदमी चुपचाप चला गया।

वह प्रधानमंत्री थे उस समय खाद्यान्न का देश में अभाव था उन्होंने उत्तर भारत के लोगों को राशन में चावल का वितरण बंद कर दिया और समस्त चावल दक्षिण भारत में भेज दिया क्योंकि चावल वहां का मुख्य भोजन है उन्होंने अपने घर में भी चावल पकाने से मना कर दिया उनका सिद्धांत था जो कहो पहले उसे स्वयं करो।

जय जवान जय किसान का नारा कब लगाया गया

सन 1965 ईस्वी में पाकिस्तान ने भारत पर आक्रमण कर दिया शास्त्री जी ने जय जवान जय किसान का नारा देते हुए गोली का जवाब टोप दे दिया। फलता भारत ने पाकिस्तान के कुछ क्षेत्र पर अधिकार कर लिया भारत की विजय हुई धरती के लाल प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने ललकारा।

हमने दिल निश्चय कर लिया है कि कश्मीर की 1 इंच भूमि भी पाकिस्तान को नहीं देंगे भारत भूमि का प्रत्येक भाग हमें प्राणों से भी अधिक प्रिय है इस अवसर पर हम भारतीय सैनिकों की प्रशंसा किए बिना नहीं रह सकते उनकी वीरता के कार्य इतिहास के पृष्ठों में सुनहरे शब्दों में लिखे जाएंगे।

अमेरिका से अनाज मिले या ना मिले वह देश के सम्मान को घटाकर कोई समझौता नहीं कर सकते हम भूखे मर जाएंगे किंतु कश्मीर के प्रश्न पर हम नहीं झुकेंगे।

लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु कब हुई

भारत में 11 जनवरी 1966 में तश्केंत उज़्बेकिस्तान हमने एक कर्मठ और विनम्र राष्ट्रीयता को सदैव के लिए खो दिया।

भारत माने अपना सब कुछ खोया और देश में अपना कुशल एवं प्रिय राष्ट्र नायक परंतु वह साधारण से महान बनने का मंत्र प्रत्येक बालक युवा एवं वृद्ध को दे गए।

लाल बहादुर शास्त्री के विषय में महत्वपूर्ण सवाल

लाल बहादुर शास्त्री का जन्म कब हुआ

लाल बहादुर शास्त्री जी का 2 अक्टूबर 1995 मुगलसराय में एक साधारण परिवार में हुआ था

लाल बहादुर शास्त्री के माता पिता का क्या नाम था

इनके पिता का नाम शारदा प्रसाद श्रीवास्तव और माता का नाम राम दुलारी देवी

जय जवान जय किसान का नारा कब और किसने लगाया

सन 1965 ईस्वी में पाकिस्तान ने भारत पर आक्रमण कर दिया शास्त्री जी ने जय जवान जय किसान का नारा देते हुए गोली का जवाब टोप दे दिया।

लाल बहादुर शास्त्री के पुत्र या पुत्री का नाम क्या था

लाल बहादुर शास्त्री के 6 बच्चे थे

पुत्र- अनिल शास्त्री, सुनील शास्त्री, अशोक शास्त्री और हरिकृष्णा शास्त्री

पुत्री- सुमन शास्त्री,कुसुम शास्त्री

लाल बहादुर शास्त्री के पत्नी का क्या नाम था

लाल बहादुर शास्त्री की पत्नी का नाम ललिता शास्त्री था।

लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु कब हुई

11 जनवरी 1966 में तश्केंत उज़्बेकिस्तान में हुई

लाल बहादुर शास्त्री ने कौन सा नारा दिया

जय जवान जय किसान

लाल बहादुर शास्त्री कब प्रधानमंत्री बने

9 जून 1964


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