सीरम और प्लाज्मा में क्या अंतर है (Different Between Serum and Plasma)

हेलो दोस्तों आज की जानकारी में हम बात करने वाले हैं सीरम और प्लाज्मा के बारे में सीरम और प्लाज्मा में क्या अंतर होता है और दोनों में क्या समानताएं होती हैं इसके बारे में जानेंगे। सबसे पहले हम ब्लड सिरम और ब्लड प्लाज्मा को अलग-अलग तरीके से समझ लेते हैं

खून का थक्का जमना जब ब्लड को कांच के ट्यूब में या फिर ब्लड टेस्ट ट्यूब में एकत्र किया जाता है तो 5 से 10 मिनट में ब्लड क्लोट हो जाता है। इसका मतलब पांच से दस मिनट में ब्लड जम जाता है। ब्लड जम जाने पर दो भागों में अलग हो जाता है। सीरम जो पीले रंग का भाग ऊपर होता है और दूसरा क्लाॅट या थक्का जो नीचे बैठ जाता है उसे सॉलिड भी कहा जाता है। और जो ऊपर लिक्विड भाग बचता है उसे सीरम कहते हैं।

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अब जानते हैं प्लाज्मा के बारे में यदि ब्लड को एकत्रित करते समय उसमें एंटीकोगुलेंट (अन्य स्कंदन लोधी) ब्लड को जमने से रोकने वाला को मिला दिया जाए तो ब्लड जम नहीं पाता और तरल ही बना रहता है ब्लड में क्लोराइड ऑक्सलेट, ट्रायसोडियम सिट्रेट और ईडीटीए मिलाने पर ब्लड जमता नहीं है सरल रूप में रहता है। एंटीकोगुलेंट मिला हुआ ब्लड दो लिक्विड भाग में अलग होता है पहला और दूसरा ब्लड सेल्स जो समय के साथ तली में एकत्रित हो जाती है क्लॉट के ऊपर परत में एरिथ्रोसाइट की परत होती है। और ऊपर प्लाज्मा होता है।

Plasma क्या है?

प्लाज्मा कुल रक्त मात्रा का लगभग 55% बनाता है। यह रक्त का तरल भाग है और 90% पानी है। पानी के अलावा, प्लाज्मा में फाइब्रिनोजेन (जो रक्त के सामान्य थक्के में योगदान देता है) और एल्ब्यूमिन (जो आपके रक्तप्रवाह में तरल पदार्थ रखने और अन्य ऊतकों में रिसाव को रोकने का काम करता है) भी होता है।

रक्त में प्लाज्मा का उद्देश्य पूरे शरीर में सभी प्रोटीन, पोषक तत्व, एंटीबॉडी, हार्मोन आदि का परिवहन करना है। जैसे-जैसे प्लाज्मा शरीर के चारों ओर दौड़ता है, कोशिकाएं अपने कचरे को प्लाज्मा में जमा कर देंगी, जो प्लाज्मा के दूसरे काम में योगदान देता है: कचरे को हटाना।

ब्लड सीरम और प्लाज्मा में क्या अंतर है ?

चलिए समझ लेते है सीरम और प्लाज्मा के मुख्य क्या क्या अंतर है।

  1. प्लाज्मा एंटीकोगुलेटेड ब्लड से प्राप्त किया जाता है, सिरम बिना एंटीकोगुलेंट के सेपरेट हो जाता है।
  2. प्लाज्मा में क्लोटिंग फैक्टर पाए जाते हैं जो कि ब्लड को क्लोज करने में हेल्प करते हैं सीरम में क्लोटिंग फैक्टर नहीं पाए जाते हैं।
  3. प्लाज्मा में अन्य प्रोटीन के साथ घुलनशील प्रोटीन, फाइब्रिनोजन कहते हैं वह पाया जाता है जबकि सीरम में फाइब्रिनोजन नहीं होता है लेकिन सभी प्रोटीन पाया जाता है।
  4. ब्लड में प्लाज्मा की क्वांटिटी ज्यादा होती है सीरम के बजाएं। प्लाज्मा ब्लड का 55% भाग होता है।
  5. प्लाज्मा का इस्तेमाल कॉगुलेशन टेस्ट के लिए किया जाता है। सीरम सेरो डायग्नोसिस टेस्ट के लिए ज्यादा है
  6. प्लाज्मा का इस्तेमाल ब्लड ट्रांसफ्यूजन में किया जाता है।
  7. प्लाज्मा को ब्लड से अलग करना आसान होता है जबकि ब्लड से सीरम की मात्रा को अलग करना थोड़ा कठिन होता है।
  8. सीरम में 90% पानी होता है जबकि प्लाज्मा में 92-95% पानी होता है।
  9. सीरम को 2 से 6 डिग्री सेल्सियस पर कई दिनों तक रखा जा सकता है। जबकि फ्रोजन प्लाज्मा को 1 वर्ष तक रखा जा सकता है।
  10. सीरम का घनत्व 1.004 g/ml होता है जबकि प्लाज्मा का घनत्व लगभग 1025 kg/m3 या 1.025 g/ml होता है।

प्लाज्मा और सीरम में अंतर

सीरम और प्लाज्मा रक्त के तरल भाग से प्राप्त होते हैं जो कोशिकाओं को हटा दिए जाने पर प्राप्त होते हैं। हालांकि, प्लाज्मा और सीरम के बीच महत्वपूर्ण अंतर है। सीरम वह तरल पदार्थ है जो रक्त का थक्का जमने के बाद बचता है। जबकि, प्लाज्मा वह तरल है जो जमावट को रोकने के लिए थक्कारोधी मिलाने पर बना रहता है।

प्लाज्मा और सीरम के बीच महत्वपूर्ण अंतर निम्नलिखित हैं:

प्लाज्मासीरम
रक्त का एक पारदर्शी, भूसे के रंग का, तरल भाग।एक पतला तरल पदार्थ, रक्त का बाह्य भाग।
यह सीरम और थक्के कारक से बना है।यह रक्त का वह भाग होता है जिसमें क्लॉटिंग फैक्टर की कमी होती है।
यह थक्कारोधी के साथ रक्त को सेंट्रीफ्यूग करने के बाद प्राप्त किया जाता है।यह जमा हुए रक्त के अपकेंद्रण के बाद प्राप्त किया जाता है।
रक्त के नमूने से प्लाज्मा प्राप्त करने के लिए थक्का-रोधी की आवश्यकता होती है।रक्त के नमूने से सीरम को अलग करने के लिए थक्कारोधी की आवश्यकता नहीं होती है।
रक्त की कुल मात्रा का 55% होता है।प्लाज्मा की तुलना में कम मात्रा।
प्लाज्मा को रक्त के नमूने से अलग करने के लिए तुलनात्मक रूप से आसान और कम समय की आवश्यकता होती है।रक्त के नमूने से सीरम को अलग करना मुश्किल होता है। यह एक समय लेने वाली प्रक्रिया है।
फाइब्रिनोजेन होता है।फाइब्रिनोजेन की कमी होती है।
प्रोटीन, लवण, लिपिड और ग्लूकोज के साथ 92% पानी होता है।भंग हार्मोन, प्रोटीन, खनिज और कार्बन डाइऑक्साइड के साथ 90% पानी से मिलकर बनता है।
1.025 g/ml घनत्व है1.024 ग्राम/एमएल घनत्व है।
एक लंबी शैल्फ जीवन है। इसे दस साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है।एक छोटा शैल्फ जीवन है। इसे कुछ महीनों तक ही सुरक्षित रखा जा सकता है।
प्लाज्मा उत्सर्जी उत्पाद परिवहन का मुख्य माध्यम है।इलेक्ट्रोलाइट्स का एक महत्वपूर्ण स्रोत।
प्लाज्मा में कोशिकाएं स्वतंत्र रूप से निलंबित रहती हैं।थक्का बनने से कोशिकाएं आपस में जुड़ जाती हैं।

ऊपर बताए गए जानकारी में मुख्य रूप से सीरम और प्लाज्मा के अंतर है। जो एग्जाम में भी पीछे जा सकते है।

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