पौधों में प्रजनन क्रिया कैसे होती है इसका संक्षिप्त वर्णन

पौधों में प्रजनन कैसे होता है इसके बारे में विभिन्न जानकारी पृथ्वी पर जीवन का मूल आधार है वनस्पतियां विभिन्न प्रकार के जीत प्राणी वनस्पतियों के अभाव में विलुप्त हो जाएंगे क्योंकि प्राणी भोजन के लिए मुख्य रूप से इन पर निर्भर हैं भोजन की अतिरिक्त वनस्पतियां हमारी वक्ताओं की अन्य वस्तुओं की पूर्ति करते हैं।

पौधों में प्रजनन कैसे होता है प्रजनन के प्रकार

जीव जंतुओं की भांति पौधे वनस्पति अभी प्रजनन करती हैं तथा इस प्रकार ने पौधों का सृजन होता है मुख्य रूप से वनस्पति के प्रजनन की दो विधियां हैं।

  1. लैंगिक प्रजनन
  2. अलैंगिक प्रजनन

लैंगिक प्रजनन क्या है कैसे होता है।

इस प्रक्रिया में प्रजनन बीजों के जरिए होता है अधिकतर पौधे फूल उत्पन्न करते हैं इन फूलों से फल तथा बीज बनते हैं यह बीच पर्याप्त मात्रा में वायु जल तथा तापमान ग्रहण करके पौधों का जन्म देती हैं। किसी पौधे का विकास मुख्यता इन्हीं तीन कारकों पर निर्भर होता है।

यदि ए जलवायु दशाएं सही मात्रा में नहीं मिलती है तो एक पौधे लोग नहीं पाते पौधों के फूलों में परागण होने से फल बनता है कुछ फलों में एक बीज होता है तथा कुछ फलों में असंग बीज होते हैं।

बीजों की आंतरिक संरचना।

एक बीज के तीन प्रमुख भाग होते हैं-आवरण बीज पत्र तथा भ्रूण। आवरण का मुख्य कार्य शिशु पौधे को सुरक्षित रखना है 20 पत्रों का मुख्य कार्य शिशु पौधों का पोषण करना है जून का मुख्य कार्य किस पौधे को नए पौधों में विकसित करना है।

बीजों का अंकुरण

बीज से शिशु पौधे के उत्पन्न होने को प्रक्रिया को अंकुरण कहते हैं एक वजह से बहुत से बीज उत्पन्न होते हैं परंतु बेबीज ही अंकुरित होते हैं जिनके अनुकूल परिस्थितियां प्राप्त होती हैं अनुकूल परिस्थितियों में वायु जल तथा तापमान का होना आवश्यक है।

अंकुरित बीज इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन गैस का उपयोग करते हैं। अतः इस समय इनके लिए वालों का होना आवश्यक है जल का कार्य बीज के बीच आवरण को मुलायम बनाना है तथा छोटे पौधे के लिए उपयुक्त भोजन बनाकर बीज पत्र में एकत्रित करना है।

बिजावर के मुलायम होने के पश्चात पौधा उस आवरण को तोड़कर बाहर आ जाता है पहले जगह निकलती हैं तत्पश्चात तरह निकलता है शीघ्र ही यह सूर्य के प्रकाश की दिशा में बढ़ने लगता है तथा भोजन बनाने लगता है।

यदि कोई भी सही प्रतियां प्राप्त नहीं करता है तब इस पौधे का विकास नहीं होता है इस प्रकार यह चक्कर अपने आप चलता रहता है।

बीच में अंकुरण की क्रिया पर प्रयोग

कांच के चार भी कर लीजिए प्रत्येक भी कर का कुछ भाग मिट्टी से भर दीजिए।

प्रत्येक भी कर में सेम की तीन या चार बीजों को मिट्टी की सतह से दो या तीन सेंटीमीटर नीचे दबा दीजिए।

पहले एक भी कर में बीजों को जल्द से भिगो दीजिये दूसरे भी कर में इतना जल डालिए की बीज मिट्टी की सतह से थोड़ा ऊपर आ जाए तीसरे बिखर में जल ना डालें इन तीनों मित्रों को गर्म स्थान पर रखिए खुश दिनों के पश्चात हम देखते हैं कि।

  1. पहले भी कर में बीज अंकुरित नहीं हुए क्योंकि बीजों के लिए पर्याप्त वायु नहीं थी।
  2. दूसरी पीकर में बीज अंकुरित हो गए हैं क्योंकि उन्हें उचित मात्रा में वायु गर्मी और जल प्राप्त हुआ।
  3. तीसरे बिखर में बीजों को जल प्राप्त नहीं हुआ परिणामस्वरूप वे अंकुरित नहीं हुई।
  4. चौथे पीकर को गीली मिट्टी के साथ किसी ठंडे स्थान पर रखने पर बीज अंकुरित नहीं होंगे क्योंकि भी कर को पर्याप्त मात्रा में गर्मी प्राप्त नहीं हुई।

अलैंगिक प्रजनन क्या है कैसे होता है।

इस प्रक्रिया में पौधे का प्रजनन जड़ तना पत्ती आदि के माध्यम से होता है इस प्रजनन को पहुंचे प्रजनन भी कहा जाता है।

बहुत से पौधे पुराने पौधों के टुकड़ों द्वारा उत्पन्न होते हैं इसको कर्म विधि कहते हैं। कटे हुए टुकड़े में काकी का होना आवश्यक है जब इन टुकड़ों को जमीन में रोपा जाता है तो कलिका से एक नया पौधा उत्पन्न होता है।

  • उदाहरण के लिए गन्ना पर हम प्रयोग करते हैं।

कुछ पौधों की भूमि के तनु में भोजन तथा कणिकाएं होती हैं तथा प्रत्येक कलिका से पौधा उत्पन्न होता है

  • उदाहरण के लिए आलू भी देख सकते हैं

कुछ पौधों का प्रजनन जड़ के माध्यम से होता है।

  • उदाहरण के लिए हम आर्मी शकरकंदी देख सकते हैं

फसल किसे कहते हैं कौन-कौन सी फसलें होनी चाहिए

वह वनस्पति है जो मानव के भोजन की आवश्यकता के लिए वही जाती है उन्हें फसलें कहा जाता है भारतीय प्रमुख फसलों में गेहूं चावल मक्का ज्वार बजारा चना का आदि।

भारत में मुख्य रूप से रवि तथा खरीफ की फसलें बोई जाती हैं।

रवि की फसलों में गेहूं चना इत्यादि है तथा शीत ऋतु में इन्हें बोया जाता है।

खरीफ की फसलों में चावल मक्का ज्वार इत्यादि है तथा इसे ग्रीष्म ऋतु में भर जाता है।

अच्छी और बेहतर फसल के लिए किसानों को निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।

  • उन्नत किस्म के बीज बोने चाहिए
  • खेत की मिट्टी की भली-भांति गुड़ाई होनी चाहिए
  • मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ाने के लिए रसायनिक खादों का प्रयोग करना चाहिए।
  • सही समय पर पर्याप्त सिंचाई करनी चाहिए

फसलों की अच्छी पैदावार के लिए उनकी देखरेख करना आवश्यक है इसके लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिए।

  • हानिकारक कीटों से फसलों की सुरक्षा करनी चाहिए इसके लिए डीडीटी वा गमिक्सिंग जैसे कि चारों ना सको का छिड़काव करना चाहिए।
  • विभिन्न पशुओं से फसलों की सुरक्षा करनी चाहिए
  • खेत में विभिन्न प्रकार की फसलों व आनी चाहिए।

इसे फसल चक्र कहा जाता है अलग-अलग फसलें उगाने से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बनी रहती है।

हमने जानकारी में आपको पौधों में प्रजनन कैसे होता है और पौधों में प्रजनन के कितने प्रकार का होता है। और लैंगिक प्रजनन अलैंगिक प्रजनन के बारे में उदाहरण दे करके बताया। और फसल के बारे में भी बताया गया है ऐसे ही जानकारी को पढ़ने के लिए हमारे इस वेबसाइट पर विजिट करते रहे।

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