Rice Farming in Hindi धान की खेती कैसे की जाती हैै ?

धान की खेती-भारत में 3 ऋतुएं (जाड़ा, गर्मी बरसात) होती हैं इन तीनों ऋतुओं के अनुसार फसलों को रवि, खरीफ व जायद में वर्गीकृत किया गया है जो फसलें वर्षा ऋतु में उगाई ही आती हैं उन्हें खरीफ की फसल जो शीत ऋतु में उगाई जाती है उन्हें रवि की फसल एवं जो गर्मी ऋतु में उगाई जाती हैं जायद की फसल कहते हैं।

धान-की-खेती-कैसे-करते-है

वर्षा ऋतु में जो फसलें उगाई जाती है उनमें किस फसल को अधिक पानी की आवश्यकता होती है जैसा कि हम जानते हैं धान की फसल को अधिक पानी की आवश्यकता होती है धान खरीद की प्रमुख फसल है धान की उन्नत खेती के लिए निम्नलिखित बात का जानना आवश्यक है।

  • संस्कृत प्रजातियों का चयन जलवायु मिट्टी सिंचाई के साधन जलभराव तथा बुवाई एवं रोपाई की अनुकूलता के अनुसार करना चाहिए।
  • प्रमाणित बीजों का ही प्रयोग करना चाहिए।
  • समय पर रोपाई करनी चाहिए।

धान की खेती कैसे करते है ?

धान भारत की एक महत्वपूर्ण फसल है जोकि जोताई योग क्षेत्र के लगभग एक चौथाई हिस्से में उगाई जाती है और भारत की लगभग आधी आबादी इसे मुख्य भोजन के रूप में प्रयोग करती है पिछले 45 वर्षों के दौरान पंजाब में धान की पैदावार में बहुत ज्यादा उन्नति हासिल की है नई टेक्नोलॉजी और अच्छी पैदावार करने वाली बीजों के प्रयोग के कारण धान की पैदावार पंजाब में सबसे ज्यादा होती है।

1. धान के लिए मिट्टी कैसी होनी चाहिए

भूमि की तैयारी का तात्पर्य खेतों की जुताई समतलीकरण एवं मेड बंदी करने से है खेतों की मेड बंदी करके 2-3 जुटाई गर्मी के समय में ही करनी चाहिए मेड़बंदी से वर्षा का पानी खेतों में संचित रहता है रोपाई के समय खेत में पानी भरकर जुताई करनी चाहिए। इस फसल को मिट्टी की अलग-अलग किस्में जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पीएच 5.0 से 9.5 के बीच होती है इसमें उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतीली से लेकर गारी मिट्टी तक और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सूखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है।

2. धान के लिए जमीन की तैयारी कैसे करें

गेहूं की कटाई के बाद जमीन पर हरी खाद के तौर पर मई के पहले सप्ताह में डेंचा (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़), सन (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़) या लोबिया (बीज दर 12 किलोग्राम प्रति एकड़) की बिजाई करनी चाहिए तथा जब फसल 6 से 8 सप्ताह की हो जाए तो इसे खेत में कद्दू करने से 1 दिन में ही जोत देना चाहिए इस तरह प्रति एकड़ 25 किलो नाइट्रोजन खाद की बचत होती है और भूमि को समतल करने के लिए लेजर लेवलर का प्रयोग किया जाता है इसके बाद खेत में पानी खड़ा कर दें ताकि उनके अंदर ऊंचे नीचे स्थानों की पहचान हो सके इस तरह पानी के रिसाव के कारण पानी की होने वाली बर्बादी को कम किया जा सके।

2.धान की प्रमुख प्रजातियों और उसका चयन

फसलों की पैदावार पर प्रजातियों का अधिक प्रभाव पड़ता है अतः धान की खेती के लिए क्षेत्र के अनुसार उचित को प्रजातियों का चयन करना आवश्यक होता है।

  1. सीधी बुआई-साकेत-4, गोविंद, अश्वनी एंड नरेंद्र-118
  2. रोपाई-नरेंद्र-97, साकेत-4, रतना, सरजू-52, पंत धान-12, आई आर-8
  3. सुगंधित धान-टा-3, बासमती-370, पूसा बासमती-1, हरियाणा बासमती-1

3.शुद्ध एवं प्रमाणित बीज

प्रमाणित बीज से उत्पादन अधिक मिलता है अतः किसान को संतुष्ट प्रमाणित बीज का ही चयन करना चाहिए फिर से कों को प्रमाणित बीज से उन्नत बीज को अपने खेत का बीज दूसरे साल बीज के लिए प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे उत्पादन कम हो जाता है।

4.उर्वरकों का संतुलित प्रयोग एवं विधि

उर्वरकों का प्रयोग सदैव मृदा परीक्षण के आधार पर ही करना चाहिए।

सिंचित दशा में– इस स्थिति में वर्जन 120 फास्फोरस 60 फुटा 60 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर प्रयोग करना चाहिए। नत्रजन की आधी मात्रा तथा फास्फोरस पोटाश की पूरी माता रुपए के एक या 2 दिन खेत में देना चाहिए नत्रजन की शेष मात्रा को बराबर दो भागों में बांट कर कल्ले निकलते समय एवं बाली निकलने से पूर्व छिड़क कर देना चाहिए।

सीधी बुवाई में- धान की बुवाई सीधे खेतों में छिटकर भी की जाती है अधिक उपज देने वाली प्रजातियों में नत्रजन 120, फास्फोरस 60 तथा पोटाश 60 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर दिया जाता है। नत्रजन की एक चौथाई मात्रा तथा फास्फोरस में पोटाश की पूरी मात्रा पुणे में ब्रिज के नीचे जाना चाहिए नत्रजन का 2 चौथाई भाग कल्ले फूटते समय तथा शेष एक चौथाई भाग बाली बनने से पूर्व प्रयोग करना चाहिए।

5.धान की खेती के लिए नर्सरी (पौधे)

एक हेक्टेयर क्षेत्रफल की रोपाई के लिए महीन धान का 30 किलोग्राम मध्यम धान का 35 किलोग्राम और मोटे धान का 40 किलोग्राम बीज पौधा तैयार करने के लिए पर्याप्त होता है। एक हेक्टेयर नर्सरी से 15 हेक्टेयर क्षेत्रफल की रोपाई होती है नर्सरी में पौधों की उचित बढ़वार के लिए 100 किलोग्राम नत्रजन एवं 50 किलोग्राम फास्फोरस प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना चाहिए खैरा रोग के नियंत्रण हेतु 5 किलोग्राम जिंक सल्फेट का 2% यूरिया के साथ खून बनाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करना चाहिए नर्सरी में कीड़ों के बचाव हेतु क्लोरोफॉर्म बीसीसी इमल्शन कंसंट्रेट डेढ़ लीटर को 800 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए।

6.रोपाई का समय व तिथि

लाइन से लाइन 15 से 20 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर रखी जाती है स्थान पर दो तीन पौधे तीन चार सेंटीमीटर की गहराई पर लगाए जाते हैं नर्सरी में पौधे 20 से 25 दिन में रुपए के लिए तैयार हो जाते हैं पौधों की रोपाई जून के अंतिम सप्ताह से लेकर जुलाई के अंत तक की जाती है।

7.खरपतवार नियंत्रण

धान की बुवाई या रोपाई करने के बीच 25 दिन बाद उसे उगे हुए खरपतवार ओं को खुरपी हो या पेडी मीटर की सहायता से निकाल देना चाहिए रुपए वाले धान के खेत में घास फूस एवं चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार ओं के नियंत्रण हेतु बुटाक्लोर 50cc 3 से 4 लीटर अथवा दूर रख लो प्रतिशत जी न्यूज़ 30 से 40 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर प्रयोग किया जाता है खरपतवार नाशक रसायनों का प्रयोग करते समय खेत में 4 से 5 सेंटीमीटर पानी भरा होना आवश्यक है।

8.धान में हानिकारक कीट और रोग नियंत्रण

धान के खेत में रोपाई से कटाई तक विभिन्न प्रकार के कीड़े एवं रोग लगते हैं धान में लगने वाले प्रमुख कीट दीमक गंदी वर्क सैनिक की हर अब खुद का पति लपेट कीट तथा तना छेदक आदि होते हैं।

  • दीमक-धाम के दर्शन एवं पत्तियों को निश्चित दिशा में बुवाई किए हुए पौधों को दीमक का कर नष्ट कर देती हैं दीमक से बचने के लिए सड़ी हुई गोबर की खाद का प्रयोग करना चाहिए फसलों के अवशेष को नष्ट कर देना चाहिए हम कच्चे गोबर का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • गंदी बग-धान की खड़ी फसल में हरे रंग के लंबे बेलना कार्की मेरे देखते हैं उसे गंदी वर्क करते हैं इसके शिशु व पूर्ण दोनों दुग्ध अवस्था में बालियों के रस चूस लेते हैं और बालियां सफेद हो जाते हैं।

नियंत्रण

  • खेत में खरपतवार से मुक्त रखना चाहिए
  • 5% मेलाथियान धूल का 20 से 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से फसलों पर छिड़काव करना चाहिए
  • सैनिक कीड़-बालिया काटने वाले सैनिक कीड़े की स्पीड की चूड़ियां दिन में कल्लू व मृदा दरारों में छिपी रहती है एक कीट रात में निकल कर एक पौधों पर चढ़कर धान की बालियों को काटकर जमीन पर गिरा देते हैं।

नियंत्रण

इसके नियंत्रण हेतु एंडोसल्फान 35 ईसी का 1.25 लीटर या क्लोरोपायरीफास का 1.50 लीटर 600 से 800 लीटर पानी में मिलाकर फसल पर 10 से 15 दिन के अंतर पर दो-तीन बार छिड़काव करना चाहिए।

रोग धान की फसल में निम्नलिखित प्रमुख रोग लगते हैं।

  • खैरा रोग
  •  जीवाणु झुलसा रोग
  •  झोंका
  • टुग्रो
  • खैरा रोग-यह रोग भू में जस्ता जिंक की कमी के कारण होता है योगी पहुंचे आकार में छोटे हो जाते हैं तथा पत्तियों पर कत्थई रंग के धब्बे पड़ जाते हैं इसकी रोकथाम के लिए 5 किलोग्राम जिंक सल्फेट था दुश्मन ने 5 किलोग्राम बुझा हुआ चुन अथवा 20 किलोग्राम यूरिया 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से फसल पर छिड़काव करना चाहिए।

जीवाणु झुलसा रोग की पहचान एवं उपचार

इस रोग में पत्तियों के किनारे या नोखे एकदम सूखने लगते हैं। फसल पीली पड़ जाती है इसके नियंत्रण हेतु खेत का पानी निकाल लेना चाहिए रसायनिक उपचार में 15 ग्राम स्ट्रैप्टोसाइकिलिंन व कॉपर ऑक्सिक्लोराइड के 500 ग्राम मात्रा को 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हैक्टेयर दो से तीन बार छिड़काव करना चाहिए।

9.धान की कटाई उपज

धान की बालियां जब पीली होकर लटक जाएं तब कटाई की जाती है कटे धान के पौधों को सूखने के लिए खेत में दो से तीन दिनों तक छोड़ देते हैं ऐसा करने से धान की लड़ाई में आसानी होती है तथा पुआल सड़न से बच जाता है औसतन 50 से 55 कुंतल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त होती है।

धान की खेती के लिए प्रमुख सवाल और जवाब

प्रश्न-धान की खेती के लिए मिट्टी कैसी होनी चाहिए।

उत्तर-धान की खेती के लिए मध्यम काली एवं दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है लेकिन यह किसी भी प्रकार के मिट्टी में उगाई जा सकती है बस इसके लिए बराबर पाने की मात्रा मिलती रहे पानी की कमी ना होने पाए।

प्रश्न-धान की खेती कब की जाती है ?

उत्तर-धान मुख्यता खरीफ की फसल है जिसकी बुवाई मानसून आने से पहले जून महीने के लास्ट तक कर लेनी चाहिए।

प्रश्न-धान की रोपाई कब की जाती है ?

उत्तर-धान की रोपाई 25 से 30 के पौधे होने पर कर सकते है जो जून के महीने में करना उचित होता है।

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