Silk worm- रेशमकीट क्या है रेशम के धागे कैसे तैयार किया जाता है?

रेशम किट क्या है? रेशमकीट शलभ (moth) जाति का कीट है। रेशमकीट अपने जीवन-वृत्त में अपनी रेशम ग्रन्थियों के स्राव से लम्बे एवं चमकीले धागे (रेशम) का निर्माण करते हैं। रेशम प्रोटीन, मोम एवं कैरोटिन वर्णको से मिलकर बनता है। रेशम का मुख्य उपयोग वस्त्र निर्माण में किया जाता है।

सामान्य रूप से शहतूत के रेशमकीट, बॉम्बिक्स मोराई (Mulberry silk worm : Bombyx mori) का
लार्वा शहतूत की पत्तियों पर पाया जाता है। इसीलिए इसे शहतूत का रेशमकीट कहते हैं।

इसका शरीर दृढ़, लगभग 4-5 सेमी० लम्बा एवं क्रीम रंग का होता है। इसका शरीर स्पष्ट सिर, वक्ष एवं उदर में विभक्त होता है। सिर पर एक जोड़ी संयुक्त नेत्र (compound eyes), एक जोड़ी श्रृंगिकाएँ (antennae) तथा मुखांग चूसने के लिए उपयोजित होते है।

शरीर के वक्ष भाग में दो जोड़ी फैले हुए शल्कों से आच्छादित पंख तथा तीन जोड़ी संयुक्त टाँगे (jointed legs) पायी जाती हैं।

रेशमकीट क्या है रेशम के धागे कैसे  तैयार किया जाता है

रेशम कैसे तैयार किया जाता है?

(शहतूत का रेशम कीट एकलिंगाश्रयी (dioecious) कीट है। प्रजनन काल में रेशमकीट की एक वयस्क मादा लगभग 300-400 तक निषेचित अंडे देती है। पत्तियों से गिरने की सम्भावना के निवारण हेतु एक लसलसे पदार्थ का स्रावण मादा कीट करती हैं, जिससे यै पत्तियों की सतह पर चिपक जाते है।

एक सप्ताह के पश्चात् प्रत्येक अंडे से डिभक या लारवा (larva) निकलते हैं, जो इल्ली या कैटरपिलर (caterpillar)कहलाते है। इल्ली या कैटरपिलर शहतूत की पत्तियों को तेजी से खाकर आकार में वृद्धि करते हैं और साथ ही अपेक्षाकृत सुस्त भी हो जाते हैं। पूर्ण विकसित प्रत्येक कैटरपिलर के शरीर में एक जोड़ी लार ग्रन्थियाँ(Salivary glands) होती हैं।

कैटरपिलर शीघ्र प्यूपा या क्राइसेलिस (crysalis) में रूपान्तरित हो जाते हैं और अब ये अपनी लार ग्रन्थियों द्वारा स्त्रावित गाढ़े रस जैसे पदार्थ से अपने चारों ओर एक रेशमी खोल सदृश आवरण या कोकून (cocoon) बना लेते है। लार ग्रन्थियों से यह पीले रंग का पदार्थ एक महीन नलिका के द्वारा कैटरपिलर के निचले होंठ पर स्थित छिद्र के खुलने के कारण बाहर निकलता है, जो गाढ़ा होने के कारण एक पतले धागे के रूप में ही निकल पाता है।

यह पदार्थ हवा के सम्पर्क में आते ही कड़ा होकर चमकदार रेशम के धागे के रूप में परिवर्तित हो जाता है। एक कैटरपिलर से औसतन 1000 मीटर तक रेशमका धागा निर्मित होता है, जो दो-तीन दिनों में ही निकलकर कैटरपिलर के चारों ओर उसके लगातार सिर घुमाने के कारण लिपट जाता है और कोकून (cocoon) कहलाता है।

अब यह रेशम के कीट की पूर्ण विकसित प्यूपा (pupa) अवस्था होती है। प्रत्येक प्यूपा से दो-तीन सप्ताह के अन्दर ही प्रौढ़ शलभ बन जाता है। शलभ कोकून से तत्काल बाहर निकलने का प्रयत्न करता है, अत: यह कोकून के एक भाग को गीला करके उसे कोमल व लचीला बना देता है और इस भाग में एक छिद्र बनाकर अथवा कोकून को फाड़कर बुद्धि शलभ बाहर निकलता है।

इन फटे कोकूनों से रेशम उपलब्ध नहीं होता, क्योंकि रेशम का धागा जगह-जगह से टूट जाता है। अत: रेशमप्राप्त करने के लिए कोकूनों को प्यूपा सहित जल में डालकर उबालते है।

इससे प्यूपा कोकून के भीतर मर जाते हैं और कोकून से रेशम के धागे सरलतापूर्वक अलग कर लिए जाते हैं। एक पौण्ड रेशम तैयार करने के लिए लगभग 25,000 कोकूनों की आवश्यकता होती है। एक सर्वेक्षण के आधार पर संसार भर में लगभग 50 लाख पौण्ड रेशम इन्हीं रेशम के कीटों का व्यवसायिक दृष्टि से पालन करके प्राप्त किया जाता है।

इस तरह रेशम के कीट से प्राप्त रेशम बहुमूल्य रेशमी साड़ियाँ व अन्य कीमती कपड़ों के निर्माण के काम आता है।रेशमकीट का पालन व्यवसायिक स्तर पर रेशम प्राप्त करने के लिए किया जाता है। रेशमकीट की उन्नत किस्मों का चयन रेशमकीट उद्योग चलाने की प्राथमिक आवश्यकता है। इसके लिए उस स्थान की जलवायु को विशेष ध्यान में रखना चाहिए।

रेशमकीट उद्योग की द्वितीय आवश्यकता शहतूत के ऐसे बाग लगाना है जो पौष्टिक गुणों से युक्त हो ताकि इस कीट के लारवा को हर समय भोजन के रूप में ग्रहण करने के लिए शहतूत की पत्तियाँ उपलब्ध रहे। वह स्थान जो कीटों के पालन हेतु प्रयोग किया जाता है। मचाना (machana)कहलाता है। इस क्षेत्र में प्रकाश एवं स्वच्छ वायु की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। सामान्यत: कीटों को खुले हवादार कमरों में पाला जाता है।

रेशमकिट क्या है?

रेशमकीट शलभ (moth) जाति का कीट है। जिससे रेशम के धागे तैयार किए जाते है।

रेशम किट कहा पाए जाते है?

रेशम किट को शहतूत के पेड़ो पर पाला जाता है।

रेशम किट से क्या तैयार किया जाता है?

रेशम किट के लार्वा से रेशम के धागे तैयार किया जाता है।

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