एनीमिया शरीर में खून कि कमी को दूर कैसे करे

आज की इस जानकारी में हम आपको एनीमिया के बारे में बताने वाले है। एनीमिया क्या है। क्यों और कब होता है। एनीमिया होने पर क्या करें। कारण, परिणाम और बचाव क्या क्या है।

एनेमिक होने के कारण इन बच्चों को तरह की शारीरिक और मानसिक बीमारियों को भेजना पड़ता है कि अध्याय शारीरिक विकास थकान और सांस फूलने के कारण छोटे-छोटे काम भी नहीं कर पाते कि भारत में किशोरों की संख्या दुनिया भर में किशोरों मिल जाता है।

एनीमिया क्या है।

हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन नामक तत्व है जो प्रोटीन एवं लौह तत्व का संयोजन होता है। हिमोग्लोबिन के कारण ही रक्त लाल नजर आता है।

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बच्चो में आयरन की कमी को दूर करने के लिए सरकारी अभियान चलाया जा रहा है ताकि एनीमिया की समस्या पर काबू पा सकें।

हिमोग्लोबिन कहां और कैसे बनता है।

हिमोग्लोबिन मुख्य रूप से बोन मैरो में(Bone Marrow) बनता है इसके निर्माण हेतु आयरन फोलिक एसिड विटामिन B12 (Iron Folic acid Vitamin B12) एवं कई सूक्ष्म पोषक तत्व की आवश्यक है।
महिलाओं में सामान्य हिमोग्लोबिन- महिलाओं में सामान्य हिमोग्लोबिन 11.5 से 16.5 g/l पुरुषों में सामान हिमोग्लोबिन 13.5 से 18.0 g/l होता है शरीर में उपरोक्त स्तर से कम हीमोग्लोबिन की मात्रा होने की स्थिति को एनीमिया कहते हैं।

आपके शरीर में आयरन यानी कि खून की कमी को कैसे जाने।

  • आंखो से खून की कमी का पहचान-आंखों का पीलापन यह बताने केस सर्वोत्तम तरीके में से एक है क्या आप एनीमिक है। यदि आपको आंखों में श्लेष में झिल्ली को देखने पर पीला अधिक पीला दिखाई देता है तो आपकी बॉडी में खून की कमी है।
  • जीभ से खून की कमी का पहचान– अपनी जीभ को भी देखकर खून की कमी को पहचान कर सकते हैं आपको जीभ पीला दिखाई दे तो समझ जाना चाहिए या फिर मेरे खून की कमी है।
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  • हाथ की नाखून को देखकर खून कि कमी का पहचान-हाथ के नाखूनों में भी पीलापन खून की कमी को दर्शाता है।
  • हथेलियों को देखकर खून कि कमी का पहचान-हथेलियों मेंं पीलापन या चेहरे मेंं पीलापन खून की कमी को दर्शाता कोमीन
  • इसके अलावा यदि आपके हाथ पैर में झुनझुनाहट के साथ साथ सूजन है यह भी खून की कमी की वजह से हो सकता है।

एनीमिया के कारण

  • आयरन की कमी
  • भोज्य पदार्थों में आयरन की कमी
  • शरीर में लगातार अक्षरा होना विटामिन बी12 की कमी होना
  • विटामिन सी की कमी होना शरीर में आयरन की मांग बढ़ना
  • शरीर द्वारा आयरन का कम अवशोषण होना
  • पेट में कीड़े फोलिक एसिड की कमी होना
  • बीमारी जैसे मलेरिया सिकल सेल रोग और थैलेसीमिया एचआईवी एड्स गुर्दों की बीमारी इत्यादि।

एनीमिया के परिणाम

  • काम करने में थकावट
  • सांस का फूलना
  • माहवारी में रुकना अनियमित होना अत्यधिक होना
  • घरेलू कार्य एवं खेलकूद में मन ना लगना सं
  • संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम होना

एनीमिया से बचाव

  • मेथी बथुआ सरसो चलाई पालक जैसी गाड़ी हिरंकी पत्तेदार सब्जियों में लौह तत्व की मात्रा ज्यादा होती है इन्हें लोहे की कढ़ाई में पकाकर खाएं
  • टमाटर नींबू संतरा अमरुद एवं आंवला खाएं क्योंकि इसमें विटामिन सी होता है जो शरीर में लौह तत्व के अवशोषण में मदद करता है
  • मांसाहारी भोजन जैसे मांस मछली आदमी लौह तत्व की मात्रा अधिक होती है यदि आपके घर में खाए जाते हैं तो इन्हें जरूर खाएं
  • चीनी के अलावा गुण भी खाएं क्योंकि गुड में लौह तत्व ज्यादा होता है
  • दाल को अंकुरित कर हरी पत्तेदार सब्जियों के साथ पकाएं और उसमें नींबू निचोड़ कर खाएं
  • नंगे पैर चलने की आदत से बचें जहां तक हो सके चप्पलों का इस्तेमाल करें मच्छरों से बचने का उपाय करें
  • अगर पेट में कीड़े हो तो पेट में कीड़े मारने वाली दवा स्वास्थ्य कर से लेकर खाएं या दवा अल्बेंडाजोल 400mg की आती है
  • भोजन के तुरंत बाद चाइना पिए
  • जिसके कारण लौह तत्व की कमी हो जाती है।

आयरन की गोलियां कैसे खाई जाती है।

  • कभी भी आयरन की गोली खाली पेट ना खाए।
  • गोली को चबाकर ना खाए।
  • गोली खाने के बाद 1 गिलास पानी जरूर पिए।
  • बीमार पड़ने पर गोली लेना बंद कर दे।
  • यदि कोई दिक्कत होती है तो डॉक्टर से जरूर संपर्क करे।

 फोलिक एसिड की निर्धारित कुरान

आयरन फोलिक एसिड खाने के कुछ निर्धारित खुराक दिए गए हैं। आप इसी तरह से ही आयरन फोलिक एसिड की खुराक लें।
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 1. आयरन सिरप-

जो कि 5 से 60 माह के बच्चों के लिए आता है। खुराक की मात्रा आयरन सिरप 1ml सप्ताह में 2 दिन देना है।

2.आयरन छोटी नीली गोली

आयरन की छोटी नीली गोली 4 से 10 साल के बच्चो को दी जाती है। इस गोली को 1 सप्ताह में 1 दिन खानी होती है।

3.आयरन की बड़ी नीली गोली –

आयरन की बड़ी नीली गोली 10 से 19 साल के किशोर या किशोलियों को दी जाती है। इस गोली को भी 1 सप्ताह में 1 दिन खानी होती है।

4.आयरन की लाल गोली

आयरन की लाल गोली प्रजनन आयु वर्ग  19 से 45 साल की महिलाओं को दी जाती है। जो 1 सप्ताह में 1 गोली खानी होती है।

अन्तिम शब्द –

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