बिलीरुबिन टेस्ट क्या है पीलिया जांच कब और क्यों किया जाता है ?

आज के इस जानकारी में हम बात करेंगे बिलीरुबिन टेस्ट के बारे में इसमें Bilirubin Test कितने प्रकार के होते हैं बिलीरुबिन टेस्ट का नार्मल रेंज कितना होता है बिलीरुबिन टेस्ट क्यों कराया जाता है और कौन-कौन से सिम्टम्स है जिससे लगता है बिलिरुबिन बढ़ गया है बिलीरुबिन कितना होने पर ज्वाइंडिस माना जाता है ये सभी चीजें हम इस जानकारी में जानेंगे।

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बिलीरुबिन क्या है (What is Bilirubin)

बिलीरुबिन पीले रंग का पदार्थ पिगमेंट होता है जो हीमोग्लोबिन में आरबीसी के टूटने से बनता है। यानी कि आपके ब्लड में आरबीसी जितना ज्यादा टूटेगा, बिलीरुबिन की मात्रा उतनी ज्यादा बढ़ेगी। क्योंकि हमारे ब्लड में आरबीसी ज्यादा दिनों तक जिंदा नहीं रहता उसका लाइफ साइकिल 100 से 120 दिन का होता है तो यह 100 से 120 दिन होने पर एक टूट जाता है यानी कि मर जाता है और उसके जगह पर नया आरबीसी का निर्माण होता है।

बिलीरुबिन टेस्ट क्या है (What Is Bilirubin Test) ?

बिलीरुबिन टेस्ट से ब्लड में बिलीरुबिन का लेवल मेजर किया जाता है। हमारे ब्लड में बिलीरुबिन की मात्रा कितनी है इसका पता लगाया जाता है। और यदि हमारे शरीर में यानी कि ब्लड में बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ जाती है तो ज्वाइंडिस यानी कि पीलिया माना जाता है।

लेकिन ज्वाइंडिस के अलावा और भी कई बीमारी होती हैं जैसे लिवर सिरोसिस हेपेटाइटिस एनीमिया या बाइल डक्ट स्टोन मैं भी बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ जाती है।

कौन-कौन से लक्षण में बिलीरुबिन टेस्ट किया जाता है ?

  • आंख पीला होना या स्किन पीला होना
  • पेट दर्द या भूख ना लगना
  • उल्टी होना या जी मचलना
  • पेशाब पीला होना या स्टूल डार्क ब्राउन होना
  • हेपेटाइटिस या लिवर सिरोसिस
  • एनीमिया

तीन तरह के बिलीरुबिन टेस्ट किया जाता है।

  1. Indirect bilirubin (unconjugated)
  2. Direct bilirubin (conjugated)
  3. Total bilirubin

कंज्यूगेटेड, अनकंज्यूगेटेड और टोटल बिलीरुबिन का क्या मतलब है ?

जब RBC टूटता है तो अनकंज्यूगेटेड बिलीरुबिन बनता है तो सबसे पहले वो एक प्रोटीन के साथ जुड़ता है इसे हम अनकंज्यूगेटेड बिलीरुबिन कहते हैं। और जब वह लिवर में जाता है और प्रोटीन से उसे अलग किया जाता है और शुगर के साथ जोड़ा जाता है तो इसे कंज्यूगेटेड बिलीरुबिन कहते हैं। जांच की मदद से हम जान सकते हैं अनकंज्यूगेटेड और कंज्यूगेटिड बिलीरुबिन कितना है इन दोनों मात्राओं को जोड़ने से हमें टोटल बिलीरुबिन का पता चलता है।

बिलीरुबिन टेस्ट क्यों किया जाता है

  • यह टेस्ट यदि डॉक्टर को इस बात का शक हो की पेशेंट को लीवर से रिलेटेड कुछ समस्या है
  • आपके शरीर में कहीं पीलापन दिख रहा हो
  • आंखों में या पीलापन दिख रहा हो
  • या शरीर में सूजन हो
  • या खुजलाहट आ रहा हो
  • तो यदि डॉक्टर को लगता है किसी इन्फेक्शन की वजह से बिलीरुबिन बड़ गया हो

तो ये सभी समस्या होने पर  डॉक्टर आपको बिलीरुबिन टटेस्ट के लिए रेफर करते हैं।

यह टेस्ट कैसे किया जाता है

इस टेस्ट के लिए ब्लड सैंपल की आवश्यकता होती है जो कि पेशेंट के बाजू से लिया जाता है इस टेस्ट के लिए पेशेंट के रक्त का नमूना ले लिया जाता है।

क्या इस टेस्ट से पहले किसी खास सावधानी की आवश्यकता है।

इस टेस्ट से पहले किसी खास सावधानी की जरूरत नहीं है यह टेस्ट पेशेंट की सुविधा के अनुसार कभी भी किया जा सकता है।

बिलीरुबिन की नॉर्मल मात्रा क्या है

Unconjugated Bilirubin के लिए 0.2 से 1.2mg/dl नॉर्मल माना जाती है Conjugated Bilirubin के लिए 0 से 0.3 mg/dl नॉर्मल होता है और Total Bilirubin के लिए 1.4mg/dl तक जाती है लेकिन ये वैल्यू थोड़े से ऊपर नीचे हो सकते हैं अलग-अलग लेब्रेटरी के मुताबिक।

बिलीरुबिन बढ़ने के क्या कारण हो सकते हैं

बिलीरुबिन बढ़ने के बहुत कारण हो सकते हैं

  • लिवर की बीमारी जैसे हेपेटाइटिस, सिरोसिस में बिलीरुबिन इन बढ़ जाता है
  • रक्त की बीमारियां जैसे हेमोलिटिक, एनीमिया में भी बिलीरुबिन इन बढ़ जाता है
  • इसके अलावा यदि आपके गॉलब्लैडर में पथरी है इन कारणों से भी बिलीरुबिन बढ़ सकता है

छोटे बच्चों में बिलीरुबिन बढ़ने के क्या कारण हो सकते हैं

  • छोटे बच्चों में ब्लड हीमग्लोबिन की कमी के कारण बनता है या बीमारी हिमोग्लोबिन के डिफेक्ट के वजह से होती है।
  • इसके अलावा एरिथ्रोब्लास्टोसिस फेटलिस में भी बिलीरुबिन बढ़ सकता है यह बीमारी मां और बच्चे के ब्लड ग्रुप के मेल ना करने की वजह से होती है इनके अलावा कुछ इनफेक्शंस में भी बिलीरुबिन बढ़ जाता है।

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