मधुमेह स्क्रीनिंग टेस्ट क्या है कैसे होता है ?

मधुमेह स्क्रीनिंग टेस्ट- हेलो दोस्तों आज की इस जानकारी में हम आपको बताएंगे मद में स्क्रीनिंग क्या होता है यानी कि डायबिटीज स्क्रीनिंग टेस्ट क्या होता है और कैसे किया जाता है।

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भारत में मधुमेह यानी कि डायबिटीज के पेशेंट बढ़ते ही जा रहे हैं एक महामारी की तरह होता जा रहा है मधुमेह से बहुत से लोग पीड़ित हैं। अब तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी मधुमेह के बहुत से मरीज होने लगे हैं यह शहरी क्षेत्रों से थोड़ा कम है लेकिन गांव में भी अब मन में के पेशेंट बढ़ रहे हैं। आज का हमारा टॉपिक है मधुमेह स्क्रीनिंग टेस्ट के बारे में चलिए इसके बारे में जान लेते हैं।

मधुमेह स्क्रीनिंग टेस्ट क्या है (What is Diabetes Screening Test)

मधुमेह स्क्रीनिंग टेस्ट में दो टेस्ट शामिल होते हैं जो ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन और ग्लूकोज उपवास रक्त परीक्षण आमतौर पर इस परीक्षण की सलाह उन रोगियों को दी जाती है जिन्हें मधुमेह होने का खतरा होता है हालांकि यह परीक्षण उन लोगों के लिए अत्यधिक अनुशंसित है जो मोटे हैं और उनके परिवार में मधुमेह हृदय रोग का पिछला इतिहास है इसके अलावा इस परीक्षण का उपयोग मधुमेह रोगियों में रक्त शर्करा के स्तर की निगरानी के लिए किया जाता है।

मधुमेह स्क्रीनिंग टेस्ट में दो जांच शामिल है

  1. खाली पेट ग्लूकोज टेस्ट
  2. ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन टेस्ट

Diabetes screening परीक्षण की तैयारी

डायबिटीज स्क्रीनिंग टेस्ट यानी कि मधुमेह टेस्ट करवाने के लिए कष्ट से 8 से 12 घंटे पहले तक पानी के अलावा कुछ भी ना खाएं और ना ही पीये।

मधुमेह स्क्रीनिंग टेस्ट क्यों की जाती है

  • मधुमेह के जोखिम कारकों की उपस्थिति में उच्च रक्त शर्करा की जांच के लिए की जाती है।
  • जांच की एक भाग के रूप में मजदूरों की जांच की जा सकती है।
  • मधुमेह रोगियों में रक्त शर्करा के स्तर की निगरानी के लिए
  • गर्भावस्था या गर्व कालीन मधुमेह के दौरान मधुमेह का पता लगाने के लिए
  • मधुमेह के उपचार के दौर से गुजर रहे रोगियों में उपचार प्रभावित की निगरानी के लिए

मधुमेह स्क्रीनिंग टेस्ट में जांच का उपाय

मधुमेह स्क्रीनिंग टेस्ट में दो प्रकार के परीक्षण शामिल है ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन परीक्षण और ग्लूकोज या नहीं फास्टिंग ब्लड परीक्षण।

1.ग्लाइकोसिलेटेड हिमोग्लोबिन परीक्षण

ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन टेस्ट रक्त में ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन के प्रतिशत को मापता है जो पिछले 2 से 3 महीने की अवधि में औसत रक्त शर्करा को दर्शाता है।

हिमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाने वाला एक प्रोटीन है और ऑक्सीजन के परिवहन के लिए जिम्मेदार है। हिमोग्लोबिन विभिन्न प्रकार के होते हैं जिनमें हीमोग्लोबिन प्रमुख होता है। रक्त शर्करा के स्तर में वृद्धि के साथ कुछ ग्लूकोज स्वचालित रूप से हीमोग्लोबिन (इस बंधन को ग्लाइकोसिलेशन या ग्लाइकेशन कहा जाता है) से बधा होता है। आरबीसी के पूरे जीवन काल के लिए बाध्य रहता है जो सामान्य रूप से 120 दिनों का होता है।

रक्त में ग्लूकोज का स्तर जितना अधिक होता है उतनी ही अधिक मात्रा में हीमोग्लोबिन ए से जुड़ता है हीमोग्लोबिन a1c गलाइकेटेड हीमोग्लोबिन का प्रमुख रूप है जैसे ही आरबीसी मर जाते हैं और प्रतिस्थापित हो जाते हैं हिमोग्लोबिन a1c साफ हो जाता है। और धीरे-धीरे गैर ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन से बदल जाता है समय की अवधि में एसबीआई वंशी स्तर का मापन उस विशिष्ट अवध में रक्त में ग्लूकोज के स्तर का संकेत देता है यह न केवल मधुमेह के निदान में मदद करता है बल्कि रक्त शर्करा के स्तर को कम करने के लिए किए गए उपायों की प्रभावशीलता की निगरानी के यह भी उपयोग है।

2.ग्लूकोज फास्टिंग स्क्रीनिंग परीक्षण

ग्लूकोज फास्टिंग ब्लड टेस्ट उपवास की अवधि के दौरान रक्त में ग्लूकोज के स्तर को मापने के लिए किया जाता है।

गुरुकुल शरीर के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत है आहार में उपयोग किए गए कार्बोहाइड्रेट ग्लूकोज बनाने के लिए शरीर में टूट जाते हैं जिसे हाथों द्वारा अवशोषित किया जाता है और रक्त द्वारा विभिन्न अंगों तक पहुंचाया जाता है। इन अंगों की कोशिकाएं आवश्यकता पड़ने पर ग्लूकोज का उपयोग ऊर्जा का उत्पादन करने के लिए करती हैं और अतिरिक्त ग्लूकोज को या तो अल्पकालीन भंडारण के लिए यकृत में ग्लाइकोजन के रूप में या लंबे समय तक भंडारण के लिए ट्राइग्लिसराइड के रूप में वसा ऊतकों में संग्रहित किया जाता है।

आंख में अवशोषित होने के बाद ग्लूकोज का उठा उपयोग और भंडारण इंसुलिन नामक हार्मोन द्वारा सुगम होता है यह हार्मोन अग्न्याशय द्वारा स्रावित होता है। इंसुलिन ग्लूकोज के परिवहन को हृदय मस्तिष्क काम करने वाली मांसपेशियों आदि जैसे अंगों तक प्रभावित करता है। यह अतिरिक्त ग्लूकोज के भंडारण को भी निर्देशित करता है इंसुलिन की एक रिया रक्त में शर्करा के स्तर को कम करती है।

भोजन के बाद रक्त में शर्करा के स्तर में वृद्धि होती है और सामान्य होने तक शर्करा के स्तर में अचानक वृद्धि को कम करने के जवाब में इंसुलिन का स्राव होता है यदि इस प्रक्रिया में रक्त को ग्लूकोज का स्तर बहुत कम हो जाता है तो गुरु का गण नामक एक अन्य अन्य सा हार्मोन निकलता है। यह हार्मोन यकृत को संग्रहित ग्लाइकोजन को गुलकोज में परिवर्तित करने के लिए निर्देशित करता है और इसे रक्त में छोड़ता है यह दोनों हार्मोन इंसुलिन और गुरु का गण रक्त शर्करा के स्तर को सामान्य सीमा के भीतर रखने के लिए एक प्रतिक्रिया तंत्र बनाते हैं उनकी गतिविधि में कोई भी असंतुलित रक्त शर्करा की अधिकता या कमी का कारण बनता है।

ग्लूकोज उपवास रक्त परीक्षण या निर्धारित करने में मदद करता है कि शरीर ग्लूकोज का कुशलता पूर्वक उपयोग या भंडारण करने में सक्षम है या नहीं रक्त में शर्करा का उच्च स्तर मरने या इंसुलिन के प्रतिरोध का संकेत देता है। टाइप 1 मधुमेह तब होता है जब इंसुलिन का उत्पादन लिया बहुत कम मात्रा में उत्पादन नहीं होता है टाइप 2 मधुमेह तब होता है जब इंसुलिन का उत्पादन होता है लेकिन शरीर द्वारा इसका प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं किया जा सकता है इन दोनों मामलों में रक्त शर्करा का स्तर बढ़ जाता है जबकि कोशिकाएं पोषण से वंचित रह जाते हैं।

ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन का सामान्य स्तर

  • सामान्य 5.7% से नीचे (39 mmol/mol लगभग)
  • प्रीडियाबेटिक 5.7%-6.4% (39 mmol/mol लगभग)
  • मधुमेह 6.5% से ऊपर (लगभग 48 mmol/mol)

5.7% से कम ग्लिकेटेड हिमोग्लोबिन रक्त शर्करा के सामान्य स्तर को दर्शाता है 4.7% से 6.4% के बीच रक्त शर्करा के स्तर को वाले प्रीडायबिटीज रोगियों में मधुमेह होने का खतरा बढ़ जाता है 6.5% से अधिक sba-1 सी अस्तर वाले मरीजों में आमतौर पर मधुमेह का निदान किया जाता है।

गुलकोज सामान्य स्तर

ग्लूकोज टेस्ट के लिए उपवास रक्त

  • सामान्य उपवास ग्लूकोज रेंज 70 से 99 मिलीग्राम प्रति डीएल (3.9mmol/l)
  • डायबिटिक 99 से 126 मिलीग्राम प्रति डीजल (5.5 mmol/l से 7.0 mmol/l)
  • मधुमेह बाद के कई परीक्षणों में 126 एमजी पत्र रियल (7.0 mmol/l से अधिक

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