Holi Festival-होली कब और क्यों मनाया जाता है?

Holi festival बहुत अच्छा होता है, लोग इस त्योहार को बड़ी धूमधाम से मनाते है। होली बसंत ऋतु में मनाये जाने वाला त्योहार है। जो भारत और नेपाल में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है।

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आज की इस जानकारी में हम होली के बारे जानने, होली कब और क्यों मनाई जाती है। होली मानने के पीछे की क्या कहानी है सब जानने।

होली कब मनाया जाता है When is Holi Celebrated)?

होली का दिन बड़ा ही शुभ दिन माना जाता है। यह हर साल बसंत ऋतु के समय फाल्गुन यानी कि मार्च महीने में आता है। जिसे पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है और यह सबसे ज्यादा खुशी देने वाला त्यौहार होता है।

होली का त्योहार कैसे मनाते है (How to Celebrate Holi Festival)?

इस दिन घरों में तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं जैसे गुझिया, पापड़, मिठाईयां।

होली का त्योहार लोग आपस में गले लग कर और एक- दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर मनाते हैं। इस दौरान धार्मिक और फाल्गुन गीत भी गाए जाते हैं। होली से 1 दिन पहले होलिका दहन किया जाता है। होलिका दहन के लिए सूखी लकड़ी, घास और गोबर का ढेर जलया जाता है। होली का त्योहार मनाने के पीछे एक पौराणिक कथा है।

होली क्यों मनाते है, होली मानने के पीछे की कहानी क्या है?

प्राचीन समय में हिरण्यकश्यप नाम का एक बलशाली असुर हुआ करता था जिसे ब्रह्मदेव से वरदान मिला था कि उसे न कोई इंसान या न कोई जानवर और न कोई देव न कोई असुर नहीं मार सकता।

हिरण्य कश्यप अपनी इस वरदान के कारण घमंडी हो गया था और खुद को ही भगवान समझने लगा था। हिरण्यकश्यप अपने राज्य के सभी लोगों पर अत्याचार करता था और सभी लोगों को भगवान विष्णु की पूजा करने से मना करता है। क्योंकि वह अपने छोटे भाई की मौत का बदला लेना चाहता था जिससे भगवान विष्णु ने मारा था।

हिरण्यकश्यप का 1 पुत्र था जिसका नाम प्रहलाद था। एक असुर का पुत्र होने के बावजूद वह भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था। हिरण्यकश्यप के डर से सभी लोग उसे भगवान मानने के लिए मजबूर थे केवल उसके पुत्र प्रहलाद को छोड़कर।

हिरण्यकश्यप को यह बात मंजूर ना थी। उसने बहुत प्रयास किया कि उसका पुत्र भगवान विष्णु की भक्ति छोड़ दें लेकिन वह हर बार अपने प्रयास में असफल रहता था। इसी क्रोध में आकर उसने अपने ही पुत्र की मृत्यु करने का फैसला किया।

उसने अपनी बहन होलिका से सहायता मांगी। होलिका को भी भगवान शिव से वरदान प्राप्त था कि वह आग में जल नहीं सकती। हिरण्यकश्यप ने होलिका को आदेश दिया कि वह प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर आग में बैठ जाए।

होलिका को वरदान की वजह से आग छू भी नहीं पाएगी और प्रहलाद जलकर भस्म हो जाएगा। जिससे उसके राज्य के लोगों को सबक मिलेगा कि अगर उसकी बात नहीं मानी तो उसका भी अंजाम प्रहलाद जैसा होगा।
जब होलिका प्रहलाद को लेकर आग में बैठी तो प्रहलाद भगवान विष्णु का जाप कर रहे थे। जिस कारण आग प्रहलाद को छू भी नहीं पाई जबकि होलिका उसी आग में जलकर भस्म हो गई।

तब से आज तक हिंदू धर्म के लोग इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाते हैं।

होली को सही तरीके से कैसे मनाएं

आजकल के समय में दुकानों पर केमिकल से बने रंग मिलते हैं जो हमारी त्वचा और सेहत के लिए बहुत हानिकारक होते हैं इसलिए होली को नेचुरल रंगों से खेलना चाहिए।

होली खेलने से पहले पूरे शरीर पर moisturizer या तेल लगाना चाहिए जिससे बाद में रंग छुड़ाने में आसानी हो|

होली के दिन ऐसे कपड़े पहनना चाहिए जिससे पूरा शरीर ढाका हो और आपकी त्वचा सुरक्षित रहे|

अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति को फेस मास्क का प्रयोग जरूर करना चाहिए।

होली का त्योहार कितने देशों में मनाया जाता है?

प्रवासी भारतीय जहां- जहां जाकर बसे हैं वहां -वहां होली की परंपरा पाई जाती है।पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका तथा मारीशस में भारतीयों के परंपरा के जैसे ही होली मनाई जाती है।

होलिका कौन थी?

होलिका हिरण्यकश्यप की बहन थी और प्रहलाद की बुआ थी।

हिरण्यकश्यप कौन था?

हिरण्यकश्यप एक असुर था और वो हिरण्यकरण नामक स्थान का राजा था जो अभी वर्तमान में भारत देश के राजस्थान राज्य में स्थित है।

होली में रंग क्यों लगाते है?

भगवान कृष्ण होली के दिन अपने मित्रों और गोपियों को रंग लगाया करते थे। इसलिए आज भी लोग होली पर एक दूसरे को रंग लगाते हैं।

होली में कौन कौन से पकवान बनाए?

इस दिन घरों में तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं जैसे गुझिया, पापड़, मिठाईयां।

होली कब से मनाई जाती है?

इतिहासकारों का मानना है। कि लगभग 4th Century से भारत में होली का त्यौहार मनाया जाता है।

होली क्यों मनाई जाती है

हिंदू धर्म में भगवान विष्णु तथा उनके परम भक्त प्रहलाद के सम्मान में होली का त्यौहार मनाया जाता है।

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