Cancer in Hindi कैंसर लक्षण, कारक, प्रकार और उपचार क्या है?

कैंसर (Cancer)

कैंसर रोगों का एक वर्ग है, जिसमें कोशिकाओं का समूह अनियंत्रित वृद्धि कर लगातार सम्सुत्री विभाजन द्वारा एक सौम्य गांठ(ट्यूमर) बनाते हैं कुछ कैंसर ट्यूमर नहीं बनाते हैं उदाहरण-रुधिर कैंसर (ल्यूकीमियां)।

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चिकित्सा विज्ञान की वह शाखा है जो कैंसर का अध्ययन निदान और रोकथाम से संबंधित होता है, ऑंकोलॉजी या कैंसर विज्ञान कहलाती है। कैंसर सभी आयु के लोगों को यहां तक मानव भ्रूण को भी प्रभावित करता है।अधिकांश कैंसर का प्रकोप उम्र के साथ बढ़ता है।

कैंसर के लक्षण( Symptoms of Cancer)

कैंसर के लक्षणों को तीन समूहों में विभक्त किया गया है-

1. स्थानीय कैंसर(Spot symptoms) असामान्य गांठ या सूजन, रक्त स्राव, पीड़ा वा अविभेडित कोशिकाओं से क्योंोों ट्यूमर एवं अल्सर का निर्माण, समीपवर्ती ऊतकों में संपीडन के कारण पीलिया रोग के लक्षण पैदा होना आदि।

2. मेटास्टेसिस के लक्षण(Symptoms of metastasis) लसिका परवो का आकार में वृद्धि करना, अस्थि पीड़ा, प्रभावित अस्थियों का टूटना और तंत्रिकीय लक्षण।

नोट– यह कैंसर के प्रारंभिक लक्षण नहीं है

3. प्रणालीगत लक्षण(Systematic Symptoms)मानव शरीर के वजन का घटना, भूख में कमी, थकान, अत्यधिक पसीना आना आदि।

कैंसर पैदा करने वाले कारक (Factor Responsible for Cancer)

1) DNA उत्परिवर्तन कैंसर रोग जनन का कारण है। DNA उत्परिवर्तन, कोशिश वृद्धि और मेटास्टैसिस को प्रभावित करता है। कैंसर रोग का कारक पैपिलोमा विषाणु है।

2) वे पदार्थ जिनके कारण डीएनए उत्परिवर्तन होता है उत्परिवर्तनजन कहलाते हैं।

3) वे उत्परिवर्तनजन जिनके कारण कैंसर होता है कार्सिनोजेन कहलाते हैं।

4) तंबाकू तथा धूम्रपान कैंसर की कई रूपों से संबंधित है। या फेफड़ों के कैंसर के कारणों का 10% है। लंबी अवधि तक एस्बेस्टस फाइबर के संपर्क में रहने से मेजोथेलियोमा हो सकता है।

5) तंबाकू में नाइट्रोसेमाइन और बहुत चक्रीय हाइड्रोकार्बन सहित लगभग 50 ज्ञात कार्सिनोजन पाए जाते हैं।

कैंसर के प्रकार (Types of Cancer)

मनुष्य के विभिन्न अंगों में निम्न प्रकार के कैंसर होते हैं-

1) मस्तिष्क अर्बुद( Brain tumour): यह मस्तिष्क की कोशिकाओं में होने वाले असामान्य वृद्धि है।

पहचान के लक्षण : सिर में तेज दर्द उल्टियां लगना व्यवहार में बदलाव अंगघात या लकवा हो जाना।

रोग के कारण : तनावग्रस्त रहना, पूरी नींद ना लेना, मोबाइल, सेलफोन आदि का अधिक प्रयोग करना आदि।

बचाव के उपाय : पूरी नींद ले, संतुलित व सही से पच जाने वाला भोजन करे। मेडिटेशन करें, सिटी स्कैन के माध्यम से मस्तिष्क की जांच कराए।

2) फुफ्फुस कैंसर(Lung cancer) : फेफड़ों की कोशिकाओं में अनियंत्रित वृद्धि के फलस्वरुप फेफड़ों में कैंसर की गांठ बन जाना फुफ्फुस कैंसर कहलाता है।

पहचान के लक्षण : सांस लेने में कठिनाई होना।

रोग के कारण : धूम्रपान, तंबाकू का सेवन वातावरणीय प्रदूषण आदि।

बचाव के उपाय : i) धूम्रपान तथा तंबाकू का सेवन ना करें।

ii) वातावरण को स्वच्छ बनाने के लिए अधिक वृक्ष लगाएं ।

iii) वाहनों का प्रयोग कम करे।

3)स्तन कैंसर(Breast cancer) : इस प्रकार का कैंसर आज कल महिलाओ में अधिक पाया जा रहा है। स्तन कैंसर में, स्तन कोशिकाओं में निरन्तर वृद्धि से गांठ के समान रचना बन जाती है।

पहचान के लक्षण : स्तन में गांठ का पाया जाना, स्तनों के आकार में भिन्नता मतलब स्तन का छोटा बड़ा होना।

रोग के कारण : स्तन पर गांठ होना, स्तन में उपस्थित सघन ऊतक, मोटापा, धूम्रपान व मदिरा का सेवन आदि।

बचाव के उपाय : समय- समय पर जांच या बायोप्सी करनी चाहिए।

4) मुंह का कैंसर(Mouth cancer) : मुंह के किसी भी आंतरिक भाग जैसे – मसूड़ों, होठों, जीभ के ऊपर या नीचे, मुंह के भीतर ऊपरी हिस्से में अनियंत्रित या असमन्या वृद्धि से मुंह का कैंसर उत्पन्न हो जाता है।

पहचा के लक्षण : होंठो पर सफेद धबबे, मुंह के भीतर सूजन या रसौली, मुंह के भीतर या होंठो पर अल्सर होना तथा 2-3 सप्ताह तक ठीक न होना।

रोग के कारण : बीड़ी, तंबाकू, गुटखा तथा सुपारी का सेवन।

बचाव के उपाय :i) शल्य चिकित्सक तथा रेडियोथिरेपी ।

ii) बीड़ी तंबाकू सुपारी शराब आदि का त्याग।

iii) ताजे फल तथा सब्जियों का अधिक सेवन।

5) रुधिर कैंसर(Blood cancer) : इस प्रकार का कैंसर रक्त का निर्माण करने वाली hematopoietic cells मैं उत्पन्न होता है

पहचान के लक्षण : कार्य में शिथिलता, बहुत अधिक थकान का अनुभव होना, तथा सिर में निरंतर दर्द होना।

रोग के कारण : रुधिर में अनियमितताओं का पाया जाना तथा लसीका तंत्र तथा रुधिर परिसंचरण तंत्र द्वारा इस रुधिर का पूरे शरीर में संचरण।

बचाव के उपाय : कीमोथेरेपी, विकिरण चिकित्सा व रेडियोथैरेपी ।

कैंसर के उपचार की नवीन तकनीके(New Techniques of Treatment of Cancer)

कैंसर निदान के पहले यह सिद्ध होना आवश्यक है कि वास्तव में कैंसर है भी या नहीं क्योंकि शरीर में पाई जाने वाली प्रत्येक गांठ कैंसर नहीं होती। अतः कैंसर के संदेह के निवारण हेतु अनेक तकनीकी विकसित हुई है।

1) स्क्रीनिंग(Screening)

कैंसर स्क्रीनिंग एक ऐसा प्रयास है जो लक्षणहीन आबादी में शंकाहीन कैंसर की जांच के लिए किया जाता है। इसके अंतर्गत शारीरिक परीक्षण, चिकित्सीय कल्पनाएं, रक्त तथा मूत्र परीक्षण को सम्मिलित किया गया है।

2) बायोप्सी(Biopsy)

बायोप्सी एक अत्यंत सरल तकनीक है।इसमें शल्य चिकित्सा के द्वारा ऊतक प्राप्त किया जाता है कुछ अंगों जैसे- त्वचा, स्तन आदि की बायोप्सी चिकित्सक के कार्यालय में ही की जा सकती है परंतु कुछ अंगों की बायोप्सी के लिए शल्य चिकित्सा कक्ष में क्रिया की आवश्यकता होती है। इसके द्वारा रोग विज्ञानी प्रचुरोदभवन करने वाली कोशिकाओं का प्रकार, गांठ की ऊतक वैज्ञानिक श्रेणी, अनुवांशिकता आसामान्यता तथा अन्य लक्षण स्पष्ट करते हैं।

कैंसर का उपचार(Treatment of Cancer)

वैसे तो कैंसर का कोई भी ठोस उपचार नहीं है फिर भी शुरुआत में कैंसर का पता चल जाने पर कुछ चिकित्सीय पद्धतियों द्वारा इसे फैलने से रोका जा सकता है, जैसे – कीमोथेरेपी, रेडियोथैरेपी, प्रतिरक्षाथेरेपी, मोनोक्लोनल एंटीबॉडी चिकित्सा आदि। इन उपचार विधियों का चयन घाट की स्थिति आकार व श्रेणी तथा रोग की अवस्था के अनुसार किया जाता है। उपचार का उद्देश्य शरीर को नुकसान पहुंचाए बिना कैंसर को पूरी तरह खत्म करना है। कभी-कभी शल्य चिकित्सा भी रोग के निदान हेतु सहायक सिद्ध होती है।

1) रसायन चिकित्सा(Chemotherapy): कीमोथेरेपी एक ऐसा उपचार विधि है जिसमें कैंसर का उपचार उन दवाइयों द्वारा किया जाता है जो कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट कर सकती है। कीमत है रफी शब्द का प्रयोग साइटोटॉक्सिक दवाओं(cytotoxic medicines) के लिए किया जाता है। यह दवाइयां लक्षित थेरेपी के विपरीत सामान्य रूप से विभाजित होती हुई कोशिकाओं को प्रभावित करती है।

रुधिर कैंसर का उपचार भी कीमोथेरेपी द्वारा ही किया जाता है। इस थेरेपी के फल स्वरुप अस्थि मज्जा के अलग हो जाने से शरीर के ठीक होने तथा रक्त निर्माण की क्षमता अलग अलग हो जाती है जिसस उपचार के बाद बचाव संभव हो जाता है।

2) शल्य चिकित्सा(Surgery): इस उपचार पद्धति द्वारा गैर हिमेटोलोजीकल  कैंसर(non-hematological cancer) का उपचार किया जाता है। इसमें कैंसर प्रभावित अंग अथवा गांठ को शल्य चिकित्सा द्वारा पूर्ण रूप से निकाल दिया जाता है परंतु याद तब संभव नहीं हो पाता जब कैंसर सेल चिकित्सा से पूर्व ही मेटास्टैसिस द्वारा अन्य कोशिकाओं में पहुंच जाता है।

स्तन कैंसर में स्तनोंछेदन करके तथा प्रोस्टेट कैंसर में प्रोटेस्ट छेदन करके गांठ अथवा पूरे अंग को ही निकाल दिया जाता है जिसस रोग से सुरक्षा की संभावना बढ़ जाती है।

3) टीकाकरण(Vaccination): कुछ वायरसों के संक्रमण से बचाव हेतु कुछ डी के विकसित किए गए हैं जैसे- ह्यूमन पेपिलोमा वायरस टीका(human papilloma virus vaccine), गर्भाशयी ग्रीवा कैंसर(cervical cancer) तथा हेपिटाइटिस बी टीका(hepatitis-B vaccine) यकृत कैंसर(liver cancer) से बचाव में सहायक है।

एक नवीन खोज के अनुसार कैंसर का टीका तैयार कर रहे वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि अब एक ही इंजेक्शन सभी तरह के ट्यूमर को जड़ से खत्म करने में सहायक होगा। इस इंजेक्शन का कार्य कैंसर की कोशिकाओं में पाए जाने वाले एंजाइम टेलोमरेज(telomerase) को नष्ट करना है, जिसके कारण कैंसर कोशिकाएं वृद्धि करती रहती है और नष्ट नहीं होती है।

कैंसर क्या है ?

आमतौर पर हमारे शरीर की कोशिकाएं नियंत्रित तरीके से बढ़ती है परंतु जब कोशिका असामान्य तरीके से बढ़ने लगे तथा उसमें कोई गांठ आ जाए तो यह कैंसर का रूप ले लेती है।

मुंह के कैंसर के लक्षण क्या है?

मुंह या होंठ पर ठीक ना होने वाला छाला, मुंह के किसी हिस्से का बढ़ना, मुंह से खून आना, मुंह में दर्द या खाना निगलने में कठिनाई आदि।

सारे कैंसर में से सबसे खतरनाक कैंसर कौन सा है?

लंग कैंसर (Lung cancer) यानी फेफड़ों का कैंसर सबसे खतरनाक है।

कैंसर की शुरुआत कैसे होती है?

वजन में कमी, बुखार, भूख में कमी, हड्डियों में दर्द, खांसी या मुंह से खून आना कैंसर के शुरुआती लक्षण है।

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